कलीसिया
एकता का नेतृत्व करना
उद्देश्य
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य हैकि नेता स्वस्थ और एकतायुक्त कलीसियाओ ंका निर्माण करें, जो परमेश्वर के राज्य को प्रभावशाली रूप सेआगेबढ़ाएं । एक आगुआ के रूप मेंहमेंके वल सहनशीलता (tolerance) तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हमें सच्ची एकता को सक्रिय रूप सेबढ़ावा देना चाहिए — जो परमेश्वर की उपस्थिति और आशीष सेभरी हो। जब हम बाइबल आधारित एकता को गहराई सेसमझतेहैंऔर कलीसिया मेंइसकी महत्ता को पहचानते हैं, तो हम एक ऐसी कलीसिया का निर्माण कर सकतेहैंजो संसार के लिए शक्तिशाली गवाही बने। यह सिखावन यूहन्ना 17 मेंयीशुकी प्रार्थना और अक्षम क्षमा करनेवालेदास की दृष्टांत सेप्रेरित है।
सारांश
- एकता का महत्व:
- एकमतता और एकता मेंअंतर
- यीशुकी प्रार्थना (यूहन्ना 17) के माध्यम सेबाइबल आधारित एकता को समझना
- सच्ची एकता का स्वरूप (और क्या नहीं है):
- एकता का मतलब एकरूपता या पूर्णसहमति नहीं है
- एकता परमेश्वर का वरदान है, न कि हमारा निर्माण
- एकता संबंधों पर आधारित है — इसमेंउपस्थिति और आशीष होती है
- एकता का प्रभाव:
- एकता आहत व्यक्ति और आहत करनेवालेव्यक्ति दोनों को चंगाई देती है
- एकता विभाजित संसार के लिए एक शक्तिशाली गवाही है
अध्ययन केलिए प्रश्न
- आपनेअपनी सेवकाई मेंएकता और सहनशीलता के बीच क्या अंतर देखा है?
- आपनेकिन तरीकों सेअपनी कलीसिया मेंएकता या विभाजन मेंयोगदान दिया है?
- कलीसिया मेंएकता आपके समाज मेंकलीसिया के प्रभाव को कै सेबढ़ा सकती है?
- आप अपनी कलीसिया के क्षेत्र मेंएकता को बढ़ानेके लिए कौन-सेव्यावहारिक कदम उठा सकते हैं?
- इस सप्ताह आप एकता बढ़ानेकेलिए एक व्यावहारिक कार्यक्या कर सकतेहैं?
संदर्भित बाइबल वचन
यूहन्ना 17
इफिसियों 4:3
मत्ती 18:32
अधिक अध्ययन केलिए वचन पद
मत्ती 18
इफिसियों 4:1-6
फिलिप्पियों 2:1-4