मतभेद
सबध म मेल-मलाप
उद्देश्य
यह प्रशिक्षण इस सच्चाई को प्रकट करता हैकि मेल-मिलाप के वल परमेश्वर के साथ नहीं बल्कि आपसी संबंधों मेंभी आवश्यक है। यीशुनेहमेंप्रेम, क्षमा और पुनःस्थापन के मार्गपर चलनेको कहा है। जब कलीसिया मेंटूटेहुए संबंधों को सुधारा जाता है, तो वह कलीसिया परमेश्वर की सामर्थऔर प्रेम को दर्शानेमें अधिक सक्षम होती है। मेल-मिलाप आत्मिक परिपक्वता, नम्रता और सक्रिय पहल सेहोता है।
सारांश
- मसीही जीवन और सेवकाई मेंसंबंध महत्वपूर्णहैं
- टूटी हुई मित्रता या संबंध परमेश्वर के उद्देश्य को बाधित कर सकतेहैं
- मेल-मिलाप का अर्थहै:
- क्षमा करना
- पहल करना
- पुनः जुड़ना
- विश्वास बहाल करना
- यीशुनेभी अपनेशिष्यों को यह सिखाया कि यदि किसी सेकोई विवाद हो, तो पहलेमेल करें (मत्ती 5:23-24)
- मेल-मिलाप संबंधों को चंगा करता हैऔर मसीह के प्रेम की गवाही देता है
- मेल के लिए पहल करनेवाला ही परिपक्व माना जाता है
अध्ययन केलिए प्रश्न
- क्या आपके जीवन मेंऐसा कोई टूटा हुआ संबंध हैजिसेपरमेश्वर आपको बहाल करनेके लिए बुला रहा है?
- मेल-मिलाप की पहल करनेमेंकौन-कौन सी बाधाएँआती हैंऔर उन्हेंकै सेपार किया जा सकता है?
- आप अपनी सेवकाई मेंमेल-मिलाप की संस्कृति कै सेविकसित कर सकतेहैं?
- क्या आपनेकभी अनुभव किया हैकि मेल-मिलाप नेआत्मिक स्वतंत्रता और शक्ति दी हो?
संदर्भित बाइबल वचन
मत्ती 5:23-24
2 कुरिन्थियों 5:18-20
कु लुस्सियों 3:13
रोमियों 12:18
अधिक अध्ययन केलिए वचन पद
इफिसियों 4:1-3
लूका 15:11-32
1 पतरस 4:8